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"जब नहीं शब्द का ज्ञान मुझे, तो स्वागत वचन कहूँ कैसे, जब नहीं मानता मन मेरा, तो फिर खामोश रहूँ कैसे, इसलिए व्यर्थ शब्दों से ही खुद को अगात करता हूँ, नम्र ह्रदय से निज पन्ने पर आपका स्वागत करता हूँ..."

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सच्चे प्यार का सच्चा वादा

Posted On: 15 Jul, 2016 कविता,Hindi Sahitya में

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(सच्चे प्यार में क्या सच्चे वादें होने चाहिये वो आपको इस कविता में पढने को मिलेगा)

मुझे तुमसे अपने ह्रदय की बात कहना है
मुझे तो ज़िन्दगी भर बस तुम्हारे साथ रहना है
मेरा वादा नहीं है चाँद-तारे तोड़ लाने का
मेरा वादा नहीं है उस फ़लक पर घर बनाने का
मेरा वादा नहीं है कि तेरी हर बात मानूँगा
न वादा है कि बिन कहे हर बात जानूँगा
परेशानी में अक्सर ही तुम्हें रुशवा करूँगा मैं
तेरी छोटी सी गलती पर बहुत गुस्सा करूँगा मैं
मेरा वादा नहीं है कि तुम्हें हर पल हँसाऊँगा
मुझे तुम छोड़ मत जाना भले कितना रुलाऊँगा
मैं जानता हूँ मैं तुम्हें ज्यादा सताता हूँ
तुम्हें दिल की सब बातें भी कम ही बताता हूँ
मेरा वादा है मैं सब कसमें निभाऊँगा
तुम्हें पाने की सभी रस्में निभाऊँगा
मेरी चाहत नहीं है चाँद से दीदार हो जाये
मैं चूमूँ आसमां को कोई चमत्कार हो जाये
मेरी चाहत है इतनी सी कुछ ऐसा यार हो जाये
मेरी तरह तुमको भी मुझसे प्यार हो जाये
देने को मैं तुम्हें बस चुटकी भर सिन्दूर दे दूँगा
और उसके सँग जीवन भर का अपना नूर दे दूँगा
तुम्हें गीतों में लिख-लिख कर बहुत बदनाम कर दूँगा
पर अपने दिल की दुनियाँ को तुम्हारे नाम कर दूँगा
तुम्हें रोमाँचित करती सुबह और शाम दे दूँगा
तुम्हें अपनी सफलतायें सभी अविराम दे दूँगा
तम्हें अपने जीवन का सबसे कीमती उपहार दे दूँगा
तुम्हारे हिस्से में मैं अपनी माँ का प्यार दे दूँगा
मेरा वादा है कि मैं सब वादे निभाऊँगा
तुम्हें गीतों का ग़ज़लों का बड़ा संसार दे दूँगा

मुझे तुमसे अपने ह्रदय की बात कहना है

मुझे तो ज़िन्दगी भर बस तुम्हारे साथ रहना है

मेरा वादा नहीं है चाँद-तारे तोड़ लाने का

मेरा वादा नहीं है उस फ़लक पर घर बनाने का

मेरा वादा नहीं है कि तेरी हर बात मानूँगा

न वादा है कि बिन कहे हर बात जानूँगा

परेशानी में अक्सर ही तुम्हें रुशवा करूँगा मैं

तेरी छोटी सी गलती पर बहुत गुस्सा करूँगा मैं

मेरा वादा नहीं है कि तुम्हें हर पल हँसाऊँगा

मुझे तुम छोड़ मत जाना भले कितना रुलाऊँगा

मैं जानता हूँ मैं तुम्हें ज्यादा सताता हूँ

तुम्हें दिल की सब बातें भी कम ही बताता हूँ

मेरा वादा है मैं सब कसमें निभाऊँगा

तुम्हें पाने की सभी रस्में निभाऊँगा



मेरी चाहत नहीं है चाँद से दीदार हो जाये

मैं चूमूँ आसमां को कोई चमत्कार हो जाये

मेरी चाहत है इतनी सी कुछ ऐसा यार हो जाये

मेरी तरह तुमको भी मुझसे प्यार हो जाये


देने को मैं तुम्हें बस चुटकी भर सिन्दूर दे दूँगा

और उसके सँग जीवन भर का अपना नूर दे दूँगा

तुम्हें गीतों में लिख-लिख कर बहुत बदनाम कर दूँगा

पर अपने दिल की दुनियाँ को तुम्हारे नाम कर दूँगा

तुम्हें रोमाँचित करती सुबह और शाम दे दूँगा

तुम्हें अपनी सफलतायें सभी अविराम दे दूँगा

तम्हें अपने जीवन का सबसे कीमती उपहार दे दूँगा

तुम्हारे हिस्से में मैं अपनी माँ का प्यार दे दूँगा

मेरा वादा है कि मैं सब वादे निभाऊँगा

तुम्हें गीतों का ग़ज़लों का बड़ा संसार दे दूँगा

- कुमार आशीष

http://www.facebook.com/KumarAshish28/

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