चलो कविता लिखें और मस्ती करें

"जब नहीं शब्द का ज्ञान मुझे, तो स्वागत वचन कहूँ कैसे, जब नहीं मानता मन मेरा, तो फिर खामोश रहूँ कैसे, इसलिए व्यर्थ शब्दों से ही खुद को अगात करता हूँ, नम्र ह्रदय से निज पन्ने पर आपका स्वागत करता हूँ..."

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अब तो तेरी यादें ही हैं....

Posted On: 19 Oct, 2014 Others,कविता में

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बंधुओं! आप सभी को सादर अभिवादन. बहुत दिनों बाद एक “नई” रचना के साथ “पुराने” मंच पर वापिसी कर रहा हूँ, बहुत से नए चेहरे नई प्रतिभाओं के साथ मंच पर छा गए हैं, कुछ समय पहले जो प्यार और एक स्थान इस मंच पर मिल रहा था संभव है अभी भी मिलेगा….

अब तो तेरी यादें ही हैं जीने का आधार प्रिये!

उन यादों संग जीना आसां बिन यादें दुश्वार प्रिये!

तेरी यादें मंदिर-मस्ज़िद तेरी याद शिवाला

तेरी यादों का प्यासा हूँ याद तेरी है हाला

मेरी प्यास बुझायें यादें जैसे हों मधुशाला

मगर भटकता रहूँ मैं कब तक बनकर यूँ मतवा

सागर जैसी गहरी यादें नभ सम है आकार प्रिये!

अब तो तेरी यादें ही हैं जीने का आधार प्रिये!

तेरी यादें गंगाजल सी अमृत हैं और पावन

याद तेरी है काशी-मथुरा याद तेरी वृन्दावन

याद तेरी है नभ से बरसे जैसे बरसे सावन

याद तेरी आराम मुझे दे और लगे मनभावन

याद तुम्हारी प्यारी लगती मुझको इनसे प्यार प्रिये!

अब तो तेरी यादें ही हैं जीने का आधार प्रिये!

जो भी लिखता जो भी रचता तेरी यादों का फल है

गिर जाऊं तो खुद उठ जाता मुझमें यादों का बल है

कभी जो बहकूँ मुझे सम्भाले यादें इतनी संबल हैं

धरती से आकाश छुआ ये यादों का ही प्रतिफल है

जीवन सागर के जैसा है यादों के संग पार प्रिये!

अब तो तेरी यादें ही हैं जीने का आधार प्रिये!

जब भी छिड़ता युद्ध कभी है ख्वाबों और ख्यालों में

प्यार बिचारा फँस जाता है परम्परा के जालों में

रीति-रिवाजें पहरा रखती कहना सुने दलालों के

ख्वाब बिचारा दम तोड़ता फँस शकुनी के चालों में

यादों के बल से विजयी हूँ अब तो कहीं न हार प्रिये!

अब तो तेरी यादें ही हैं जीने का आधार प्रिये!

तुमको मुझसे प्यार है लेकिन ये कैसी लाचारी है

मैं भी तो कुछ कर नहीं पाता ये कैसी दुश्वारी है

रीति-रिवाजें बनी समस्या शंकित पहरेदारी है

इन सारी विपदाओं पर भी तेरी यादें भारी हैं

हम दोनों के रिश्तों पर यूँ दुनियाँ का इंकार प्रिये

अब तो तेरी यादें ही हैं जीने का आधार प्रिये!

तेरे बिन हर मौसम पतझड़ मन में घोर निराशा

बिन तेरे मैं हारा-हारा मन में कहीं न आशा

दोनों को दोनों की चाहत पर मन में जिज्ञासा

किसको पकडें किसको छोड़ें भ्रमित हुई अभिलाषा

बुद्धि तेरा त्याग करे पर मन करता स्वीकार प्रिये

अब तो तेरी यादें ही हैं जीने का आधार प्रिये!

तेरी यादें कविता बनती तेरी याद कहानी

तेरी यादें बनी गज़ल हैं और आँख का पानी

राधा-कृष्ण की प्रेम कहानी सबको याद ज़बानी

फिर भी हमें न समझे कोई सब करते मनमानी

ये साँसें हैं यादों के बल यादों का आभार प्रिये

अब तो तेरी यादें ही हैं जीने का आधार प्रिये!

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

smtpushpapandey के द्वारा
November 18, 2014

आदरणीय आशीष जी आपने मेरी पोस्ट को पढ़ा और उस पर अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया दी आपका बहुत बहुत धन्यवाद आपकी कविता सिंहासन खाली करो की जनता आती है बहुत पसंद आई आपका बहुत बहुत धन्यवाद धन्यवाद श्रीमती पुष्पा पाण्डेय

    ashishgonda के द्वारा
    February 16, 2015

    देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ, और वो कविता मेरी नहीं इस देश के बहुत बड़े कवि श्री रामधारी सिंग दिनकर जी की है जो मैंने शेयर की थी

ranjanagupta के द्वारा
October 26, 2014

आशीष जी !आशीर्वाद !आप प्रयास करते रहे !सुन्दर रचना !बहुत उत्तम भाव !!

    ashishgonda के द्वारा
    October 27, 2014

    सुस्वागतम! आशीष को आशीष देकर कृतार्थ करने और रचना की प्रशंसा हेतु बहुत बहुत आभार….

sadguruji के द्वारा
October 26, 2014

तेरी यादें कविता बनती तेरी याद कहानी तेरी यादें बनी गज़ल हैं और आँख का पानी राधा-कृष्ण की प्रेम कहानी सबको याद ज़बानी फिर भी हमें न समझे कोई सब करते मनमानी ! आदरणीय आशीष गोंडा जी ! सुन्दर और प्रेरक रचना ! बहुत बहुत बधाई ! मंच पर आपका स्वागत है ! अभिनन्दन और शुभकामनाओं सहित-सद्गुरुजी !

    ashishgonda के द्वारा
    October 26, 2014

    बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री सद्गुरुजी! प्रतिक्रिया आगे भी लेखन का उत्साह दे रही है, अनेक अनेक धन्यवाद. उम्मींद है आगे भी आप अवलोकन करते रहेंगे |

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
October 25, 2014

पहली बार आपकी रचनाएँ पढने का सौभाग्य मिला ,आप लेखन जारी रखिये आशीषजी ,बहुत सुंदर रचना ,बधाई .

    ashishgonda के द्वारा
    October 26, 2014

    परम आदरणीया! सादर अभिवादन, रचना पर आपका स्वागत है, समय और लेखन का साहस देने के लिए बहुत बहुत आभार….

jlsingh के द्वारा
October 22, 2014

तेरी यादें कविता बनती तेरी याद कहानी तेरी यादें बनी गज़ल हैं और आँख का पानी राधा-कृष्ण की प्रेम कहानी सबको याद ज़बानी फिर भी हमें न समझे कोई सब करते मनमानी ये साँसें हैं यादों के बल यादों का आभार प्रिये अब तो तेरी यादें ही हैं जीने का आधार प्रिये! बहुत ही सुन्दर कविता !

    ashishgonda के द्वारा
    October 26, 2014

    बहुत बहुत आभार चाचा जी! आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार हर वक्त हर जगह (फेसबुक और जागरण) रहता है.

Bhola nath Pal के द्वारा
October 21, 2014

वाह ! बहुत खूब I खुशबू आती रहे और तुम महकते रहो I ह्रदय की पीड़ा या श्रम जो भी हो , की अच्छी अभिव्यक्ति अविरल भाव आकर्षक …………..

    ashishgonda के द्वारा
    October 22, 2014

    बहुत बहुत आभार….आपका बहुत ही ह्रदय स्पर्शी प्रतिक्रिया… प्रणाम


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