चलो कविता लिखें और मस्ती करें

"जब नहीं शब्द का ज्ञान मुझे, तो स्वागत वचन कहूँ कैसे, जब नहीं मानता मन मेरा, तो फिर खामोश रहूँ कैसे, इसलिए व्यर्थ शब्दों से ही खुद को अगात करता हूँ, नम्र ह्रदय से निज पन्ने पर आपका स्वागत करता हूँ..."

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तू मेरी लेखनी

Posted On: 28 Dec, 2012 Others में

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तू न होती अगर, गीत बनते नहीं
मैं न गाता कभी, लोग सुनते नहीं.
तू मेरी लेखनी

तुम बिना कैसे आवाज देता उसे
देखता हूँ तुझी में सदा मैं जिसे
उसके आहट का शब्दों में चित्रण कभी
तू न करती तो मैं कर न पाता नहीं
तू मेरी लेखनी

जब भी उसने कहा मुस्कुराओ सखे!
तुम हँसो जिससे मेरा भी दिल न दुखे
मैं आभार तेरा ही माना वहीँ
वो तुझसे मिली, मैं हूँ तेरा ऋणी
तू मेरी लेखनी

उसकी आवज़ ही मन में गूँजे सदा
मुझको भाने लगी उसकी हर एक अदा
जब भी मिलने बुलाया है उसने कहीं
बिन तेरे साथ के मैं भी पहुँचा नहीं
तू मेरी लेखनी

मैं तेरे एहसान के बोझ से हूँ दबा
पर मुझे तू न दे इतनी लम्बी सजा
बिछुड़ना नहीं यूँ तू मुझसे कभी
बिन तुम्हारे मेरा कोई भी अब नहीं
तू मेरी लेखनी

मत सुनाओ मुझे धर्म और शास्त्र को
मैं तुम्हारे लिए सह लूँ ब्रम्हास्त्र को
तेरे कारण मेरी सारी विपदा टली
बिन तुम्हारे रहूँगा मैं जीवित नहीं
तू मेरी लेखनी

बात सुनकर तेरी शास्त्र घबरा गए
झुक गयीं नितियाँ अस्त्र शरमा गए
फिर मेरी तो औकात कुछ भी नहीं
पर तुम्हें छोड़कर जाने दूँगा नहीं
तू मेरी लेखनी

बन्द करता हूँ लिखना मैं इस भाग को
बस बनाए रखना अपने अनुराग को
फिर लिखूँगा तुम्हें वचन देता अभी
बस तुम रूठना अब न मुझसे कभी
तू मेरी लेखनी



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52 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mann Ki Kawita के द्वारा
November 30, 2013

तू मेरी लेखनी………………….बहुत खूब …………….

    ashishgonda के द्वारा
    December 5, 2013

    प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार…

manoranjanthakur के द्वारा
July 2, 2013

यथार्थ स्वीकारती सुंदर रचना …बधाई

    ashishgonda के द्वारा
    July 3, 2013

    आदरणीय! प्रतिक्रिया और बधाई के लिए ह्रदय से आभार….

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
June 26, 2013

सार्थक अभिव्यक्ति .आभार

    ashishgonda के द्वारा
    June 27, 2013

    सटीक प्रतिक्रिया पर बहुत धन्यवाद…

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 11, 2013

बहुत सुन्दर लिखते रहिये जीते रहिये स्नेही आशीष जी

    ashishgonda के द्वारा
    January 12, 2013

    आदरणीय दादाजी! सादर चरणस्पर्श. प्रतिक्रिया स्वरुप आशीष के लिए ह्रदय से आभार.

प्रवीण दीक्षित के द्वारा
January 7, 2013

आपकी कलम चुंबकीय है जो सहज ही पाठकों को अपनी ओर आकष्ज्र्ञित करता है …….. पढ़कर कृतज्ञ हुआ ….. हमारे ब्लाॅग पर भी पधारें … !

    ashishgonda के द्वारा
    January 12, 2013

    आदरणीय! सादर अभिवादन. मंच पर आने के लिए आभार. मेरी लेखनी में कुछ नहीं है ये केवल आप सबका प्रोत्साहन ही लिखने की प्रेरणा देता है. आपकी महानता ही मेरे लेखनी की चुम्बक है. देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ.

utkarshsingh के द्वारा
January 6, 2013

सराहनीय प्रयास | उज्जवल भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ बधाई |

    ashishgonda के द्वारा
    January 12, 2013

    मित्र! प्रतिक्रिया बधाई के लिय आभार.

Prashant Singh के द्वारा
January 5, 2013

आदरणीय आशीष जी ! बहुत उम्दा कविता लिखी है आपने पढ़ कर मज़ा आ गया | http://prashantsingh.jagranjunction.com/2013/01/04/अब-बर्दाश्त-नहीं-होता

    ashishgonda के द्वारा
    January 5, 2013

    आदरणीय मित्रवर! सादर अभिवादन. प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से आभार… जल्दी ही पहुँचता हूँ… आप जैसे बड़े लोगो से “आदरणीय”शब्द सुनकर गौरवान्वित भी हूँ और शर्मिंदा भी…

sumandubey के द्वारा
January 5, 2013

आशीष भाई कविता तो बढ़िया लिख लेते है कविता का सार अच्छा है ,बधाई तुम्हे भाई

    ashishgonda के द्वारा
    January 5, 2013

    आदरणीय बड़ी दीदी जी! सादर अभिवादन. ब्लॉग पर आपका आगमन शुभ है…प्रतिक्रिया और बधाई के लिए ह्रदय से आभार….

yatindranathchaturvedi के द्वारा
January 4, 2013

अद्भुत

    ashishgonda के द्वारा
    January 5, 2013

    आभार.

priyankatripathidiksha के द्वारा
January 4, 2013

आशीष जी ! हम आपका एवं आपके भावपूर्ण शब्दों का अभिनंदन करते हैं । इस कविता को पढ़कर कवित्त में आपकी निपुणता का स्पप्ट आभास होता है ।  क्या इस क्षेत्र में आप नए हैं? 

    ashishgonda के द्वारा
    January 5, 2013

    प्रियंका जी! ब्लॉग पर प्रथम आगमन पर स्वागत है….बहुत ही सराहनीय प्रतिक्रिया के लिये ह्रदय से आभार…. मैं ये समझ नहीं पा रहा आप किस क्षेत्र की बात कर रहीं हैं..कवितायेँ तो 8वि से लिखता हूँ इस मंच पर आये लगभग १० महीने हो गए हैं….. अभी फ़िलहाल अनुभव हीन ही हूँ..यही से सीख रहा हूँ…….. निवेदन है ऐसे ही अवलोकन करते रहिएगा.

seemakanwal के द्वारा
January 3, 2013

आशीष ख़ुदा करे तुम्हारी लेखनी का जादू हमेशा कायम रहे . बहुर सुन्दर रचना .बधाई .

    ashishgonda के द्वारा
    January 3, 2013

    आदरणीया सादर अभिवादन. प्रतिक्रिया और अपना कीमती वक्त देने के लिए ह्रदय से आभार… प्रणाम.

sureshjayswal के द्वारा
January 3, 2013

आशीष जी आपकी साडी रचनाओ की जितनी प्रशंसा की जाये कम है, इसी पर मेरी एक कविता आपके लिए, अजीब हो आशीष जी, अजब अल्फाज रखते हो, हिज्र और वस्ल के हर्फ़ रूपी सागर मै, विचरण करते हो, यूँही लिखते रहो , बहुत खूब लिखते हो, प्रेम से भर देते हो ह्रदय, देश प्रेम की कविता रूपी शब्दों से गोरान्वित करते हो, दो शब्दों से अपनी वाणी को विराम देता हूँ, सच्चे ह्रदय से फिर आपसे कहता हु, यूँही लिखते रहो, बहुत खूब लिखते हो,

    sureshjayswal के द्वारा
    January 3, 2013

    क्षमा चाहूँगा मित्रवर,सारी रचनाओ के स्थान पर साडी लिखा गया ,गलती के लिए क्षमा करे.

    ashishgonda के द्वारा
    January 3, 2013

    आदरणीय मित्र! सादर अभिवादन. आपके द्वारा भेंट की गई कविता अत्यंत सराहनीय है…ऐसा कोई बड़ा कवि ही लिख सकता है… प्रतिक्रिया और कविता के लिए आभार….

    ashishgonda के द्वारा
    January 3, 2013

    इसमें क्षमा की कोई बात नहीं है…टाइपिंग गलतियाँ तो अक्सर हो जाती हैं… आपकी महानता पर मुग्ध हूँ.. धन्यवाद.

yogi sarswat के द्वारा
January 2, 2013

मैं तेरे एहसान के बोझ से हूँ दबा पर मुझे तू न दे इतनी लम्बी सजा बिछुड़ना नहीं यूँ तू मुझसे कभी बिन तुम्हारे मेरा कोई भी अब नहीं तू मेरी लेखनी मत सुनाओ मुझे धर्म और शास्त्र को मैं तुम्हारे लिए सह लूँ ब्रम्हास्त्र को तेरे कारण मेरी सारी विपदा टली बिन तुम्हारे रहूँगा मैं जीवित नहीं तू मेरी लेखनी गज़ब के शब्द आशीष जी , जितनी तारीफ करूँ , कम रहेगी ! कल्पना के तीर बहुत दूर तक पहुँचते हैं आपके ! बहुत बहुत सुन्दर शब्द

    ashishgonda के द्वारा
    January 2, 2013

    आदरणीय! सादर अभिवादन. अत्यधिक प्रशंसा के लिए ह्रदय से आभार…. पंक्तियों को सम्मानित करने के लिए कृतज्ञता प्रकट करता हं… कल्पना के तीर आप लोगो से ही सीख रहा हूँ….उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद.

sudhajaiswal के द्वारा
January 2, 2013

तू मेरी लेखनी मत सुनाओ मुझे धर्म और शास्त्र को मैं तुम्हारे लिए सह लूँ ब्रम्हास्त्र को तेरे कारण मेरी सारी विपदा टली बिन तुम्हारे रहूँगा मैं जीवित नहीं तू मेरी लेखनी बात सुनकर तेरी शास्त्र घबरा गए झुक गयीं नितियाँ अस्त्र शरमा गए फिर मेरी तो औकात कुछ भी नहीं पर तुम्हें छोड़कर जाने दूँगा नहीं आशीष जी, बहुत सुन्दर रचना और उतनी ही सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई |

    ashishgonda के द्वारा
    January 2, 2013

    आदरणीया! सादर अभिवादन. प्रतिक्रिया स्वरुप आशीष के लिय आभार… पंक्तियों को सम्मानित करने के लिय विशेष आभार.

Sushma Gupta के द्वारा
January 1, 2013

प्रिय आशीष ,बहुत सुन्दर है आपकी लेखनी ,साथ ही लेखन उससे भी सुन्दरतम …शव्द ही कम है पूर्ण प्रसंसा के लिए ..आपकी सुन्दर लेखनी के लिए कहूँगी कि सदा आपके साथ रहे …नवबर्ष की मंगलमय कामनाओं सहित…

    ashishgonda के द्वारा
    January 1, 2013

    आदरणीया! सादर प्रणाम. बहुत अधिक प्रशंसा कर दी आपने….आपके शब्दों का सागर आपकी रचनाओं में देखने को मिलता है और ये बिल्कल सही बात है सागर से अंजुरी भर जल नहीं निकला जा सकता वरना निकालने वाले के डूबने की आशंका रहती है…आप भी मेरे लिए निकालने में असमर्थ प्रदर्शित कर रही हैं वरना आपकी बहुमुखी प्रतिभा कौन नहीं जानता? प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से आभार…आपने मुझे आशीष देने के लिए समय निकला आपका आभार.. प्रणाम.

Santlal Karun के द्वारा
December 30, 2012

आदरणीय आशीष गोंडा जी, स्वयं और विचारों को लिपिबद्ध करनेवाली जमात के लिए लेखनी की महत्ता पर  नवीन विचारों की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! नव वर्ष की मंगल कामनाएँ !

    ashishgonda के द्वारा
    December 30, 2012

    आदरणीय सादर अभिवादन. सर्वप्रथम साधुवाद एवं सद्भावनाओं तथा प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से आभार. आपको (भी) नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें. वैसे मैं इस बार नव-वर्ष नहीं मना रहा हूँ…..

chaatak के द्वारा
December 30, 2012

बहुत खूब ! इसी तरह लेखनी की उपासना जारी रहे वाग्देवी कृपा करेंगी!

    ashishgonda के द्वारा
    December 30, 2012

    आदरणीय गुरूजी! सादर चरण स्पर्श… प्रशंसा भरी प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से आभार.. आपका वरद हस्त है तो वाग्देवी से भी उमींद की जा सकती है.. गुरु गोविन्द दोउ खड़े काके लागूं पाय… प्रणाम.

akraktale के द्वारा
December 30, 2012

कलम के प्रति आभार प्रकट करती सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकारें आदरणीय आशीष जी.

    ashishgonda के द्वारा
    December 30, 2012

    आदरणीय! सादर अभिवादन सर्वप्रथम प्रतिक्रिया और बधाई के लिए ह्रदय से आभार……. फिर एक शिकायत भी सुन लीजिए….. आप मेरे आदरणीय हैं मैं आपका नहीं….कृपया शर्मिन्दा न किया करें…… आपका स्नेहाशीष आकांक्षी आशीष

bhanuprakashsharma के द्वारा
December 30, 2012

बन्द करता हूँ लिखना मैं इस भाग को बस बनाए रखना अपने अनुराग को फिर लिखूँगा तुम्हें वचन देता अभी बस तुम रूठना अब न मुझसे कभी तू मेरी लेखनी सुंदर  रचना। बस लिखते  रहो। लेखनी भी रुठेगी नहीं, बल्कि कुछ नया करेगी। 

    ashishgonda के द्वारा
    December 30, 2012

    आदरणीय! सुस्वागत सबसे पहले पंक्तियों को सम्मानित करने के लिए हार्दिक धन्यवाद. फिर आपने जो भी कहा वही मेरी वही इच्छा है….मनोकामनाओं को आपने समझा लेखन सार्थक हुआ… प्रणाम.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
December 29, 2012

कलम बदल अपना तेवर जब दिशा बदलती है तब जाकरके कुछ अनुपम रचनाएं होती हैं ! आशीष जी, सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई !

    ashishgonda के द्वारा
    December 29, 2012

    आदरणीय सादर प्रणाम. प्रतिक्रिया कविता और बधाई के लिए हृदय से आभार..

alkargupta1 के द्वारा
December 29, 2012

प्रिय आशीष, तुम अपने विचारों को , अपनी बातों को यूँ ही लेखनीबद्ध करते रहो….. तुम्हें माँ सरस्वती का आशीष मिलता रहे…. अति सुन्दर कृति के लिए शुभकामनाएं

    ashishgonda के द्वारा
    December 29, 2012

    आदरणीया ताई जी! सादर प्रणाम. प्रतिक्रिया स्वरुप आशीष और शुभकामनाओं के लिए ह्रदय से आभार.

nishamittal के द्वारा
December 29, 2012

बहुत सुन्दर ,लेखनी सदा चलती रहे और माँ शारदा अपना वरद हस्त बनाये रहें

    ashishgonda के द्वारा
    December 29, 2012

    आदरणीया माँ जी! सादर चरणसपर्श. आपका आशीष है तो माँ सरस्वती का भी मिलता रहेगा…क्योंकि मेरे लिए माँ से बढ़कर कोई नहीं…हो सकता है मैं गलत हूँ पर इस बात को दिल से निकलना नहीं चाहता……आशा है ऐसे ही आप अपना वरदहस्त रखे रहेंगी….. प्रणाम.

ajay kumar pandey के द्वारा
December 28, 2012

आशीष भाई में तो बस येही समझता हूँ की जो विचार मन से आते हैं वही लेखन हो जाता है में तो बस इतना ही कहूँगा की तुम युही लिखते रहो और लेखन बरकरार रखो तुम्हारी लेखनी कभी न छूटे यही कामना है और हाँ मेरे ब्लॉग पर भी आ जाया करो धन्यवाद

    ashishgonda के द्वारा
    December 28, 2012

    अजय भाई! प्रतिक्रिया, मेरी मनोकामना को अपनी मनोकामना बनाने और निमंत्रणके लिए ह्रदय से आभार….समय मिलते ही आपके ब्लॉग पर पहुँचता हूँ. मेरी कविता लेखन किसे कहते हैं? से सम्बंधित नहीं है…कविता में केवल मैंने अपने लेखनी से बात की है. वही पद्यबद्ध किया है……. वैसे आपके बातों से सहमत हूँ………….लेखन की सराहनिए परिभाषा दी है.

deepasingh के द्वारा
December 28, 2012

आशीष तुम्हे ढेर सारा आशीष. बस इतना कहूँगी तुम्हारी लेखनी तुमसे कभी न रूठे माँ सरस्वती का आशीर्वाद तुमपर बना रहे. सुन्दर कृति पर बधाई. वन्देमातरम.

    ashishgonda के द्वारा
    December 28, 2012

    आदरणीया! सादर अभिवादन. प्रतिक्रिया, आशीष और मेरे लिए माँ सरस्वती से प्रार्थना और बधाई के लिए ह्रदय से आभार……. “उम्र भर हो साथ सभी का चलती रहे ये कलम निरंतर” पूरा पढ़ने के लिए- http://ashishgonda.jagranjunction.com/2012/12/12/%E0%A4%86%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0/

December 28, 2012

बन्द करता हूँ लिखना मैं इस भाग को बस बनाए रखना अपने अनुराग को फिर लिखूँगा तुम्हें वचन देता अभी बस तुम रूठना अब न मुझसे कभी ….सुन्दर………………..

    ashishgonda के द्वारा
    December 28, 2012

    आदरणीय सादर प्रणाम. प्रतिक्रिया के लिए आभार.


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