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रामसेतु तोड़ना कितना उचित कितना अनुचित

Posted On: 14 Jul, 2012 Others में

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परमपूजनीय प्रातः स्मरणीय माता-पिता और नित्यवारूपा माँ सरस्वती देवी, इस मंच के सभी बड़े आदरणीय जनों को प्रणाम करता हूँ, और सभी का याथावत् अभिनन्दन करता हूँ.

बंधुओ! आज बहुत दिनों बाद आप सभी के बीच आया हूँ, इतने दिनों बाद वापसी के लिए क्षमा चाहता हूँ. आज एक विशेष मुद्दे पर आप सभी के समक्ष अपने विचार रखने थे, और मेरी एक दुविधा है जिसका समाधान केवल आप सभी मिलकर कर सकते हैं.

रामसेतु, जो कि पिछले काफी सालों से वाद-विवाद का विषय बना रहा है, उसी से सम्बंधित मुझे कुछ कहना है. जैसा की सब जानते हैं की रामसेतु पर हिंदुओं की गहरी आस्था है. ऐसा माना जाता है की अयोध्या नरेश दसरथ के सुपुत्र श्री राम ने इस सेतु का निर्माण नल-नील के हाथों करवाया था. श्री राम को समस्त विश्व में भगवान की दृष्टि से देखा जाता है, जिसके समुचित प्रमाण भी हमें मिलें हैं और सबसे बड़ा प्रमाण है हमारी आस्था हमारा विश्वास. जिस सेतु पर हिंदुओं की अगाध आस्था है, उसे तोड़ने का प्रयास चल रहा है.

भारतीये संविधान के अनुसार-“भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहाँ सभी को अपने धर्मपालन की स्वतंत्रता  है.” अब अगर राम सेतु तोड़ दिया जाए तो इसका अर्थ है करोंड़ों हिंदुओं की आस्था पर कुठाराघात करना, फिर भारत की धर्म निरपेक्षता का क्या होगा ? अर्थात कहना गलत न होगा, कि इससे संविधान की भी अवहेलना होगी, यानी भारतीय संविधान किसी भी परिस्थिति में रामसेतु खंडन की अनुमति नहीं देता है.

“अब अगर अध्यात्म कि दृष्टि से देखा जाय तो रामसेतु की चर्चा हमारे धार्मिक ग्रंथों (विशेषतयः रामायण और श्रीरामचरितमानस) में खुलकर की गयी है. हमारे धार्मिक ग्रन्थ इस बात की पुष्टि करते हैं, कि रामसेतु किसने और क्यों बनवाया ? एक महत्वपूर्ण प्रमाण श्रीरामेश्वरम मंदिर भी है, जहाँ ये सेतु स्थित है, इसी कारण उसे ‘सेतुबंधरामेश्वरम’ कहा जाता है.

वहीँ कुछ नास्तिक बुद्धजीवियों ने हमारे धर्म पर सवालिया निशान लगा दिए यहाँ तक कि भगवान श्रीराम तक को काल्पनिक कह दिया, यानी रामायण और गीता जैसी प्रसिद्ध धार्मिक पुस्तकों का कोई सम्मान नहीं? ऐसा कहकर न केवल उन्होंने हमारी आस्था को चोट पहुँचाया है वरन् हमारे धर्म का उपहास किया है, और धार्मिक ग्रंथों का अपमान किया है. अगर देखा जाय तो अध्यात्म की दृष्टि से भी रामसेतु का खंडन एक अमानवीय, अव्यवहारिक और अधर्मपूर्ण कार्य है.

अब जरा इस बात पर भी विचार करें कि रामसेतु को तोड़ना कितना सही कितना गलत ?

“बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के बीच संक्षिप्त (शार्टकट) समुद्री मार्ग तैयार करने की परियोजना का नाम है “सेतुसमुद्रम” परियोजना. इस परियोजना के अनुसार रामसेतु के बीच का 300 मीटर हिस्सा तोड़ा जाना आवश्यक है, क्योंकि ये सेतुसमुद्रम परियोजना के बीच में पड़ता है. यही राम सेतु वर्ष 2004 में सुनामी लहरों से रक्षा का कारण बना था. सुनामी सोसायटी के अध्यक्ष और भारतीय सरकार के सुनामी सलाहकार सत्यम-मूर्ति कहते हैं- दिसंबर 2004 में उस काली सुबह भारत और श्रीलंका के बीच खौफनाक लहरों ने कहर ढाने के इरादे से गुसपैठ किया. परन्तु सामने सीना ताने रामसेतु खड़ा मिला. पत्थरों और बालू से बने इस वज्र सेतु श्रृंखला से भूकम्पिये लहरें टकराई, कुछ समय के लिए सब कुछ थम गया, और फिर लहरें मुड गयीं. वे जितनी तेजी से टकराई उतनी ही तेजी से नए राह खुले समुद्र कि ओर चली गयीं. बाकी बची लहरें दो तरफ बिखर गयीं, कुछ श्रीलंका की तरफ और कुछ केरल के तटीय इलाको कि तरफ, परन्तु तब तक इन लहरों की उर्जा, आवेग और आक्रमकता नष्ट हो चुकी थी. इससे साफ़ है कि रामसेतु ने ही हमारी रक्षा की.”

माना व्यापार-वाणिज्य में तेजी लाने व परिवहन समय बचाने के लिए रामसेतु का खंडन आवश्यक है, परन्तु इस बात पर एक प्रश्न आता है कि ज्यादा महत्वपूर्ण बात कौन सी है अपना समय बचाना अथवा सुनामी से खुद की रक्षा करना ? भूगर्भवेत्ताओं का कहना है कि इस क्षेत्र में सक्रिए ज्वालामुखी और गतिमान प्रवाल भित्तियां हैं. इसलिए यहाँ की प्रकृति से छेड़-छाड़ करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है. पारिस्थितिकी विशेषज्ञ दावा करते हैं कि रामसेतु बंगाल की खाड़ी के अनियमित प्रवाहों को रोकता है. ऐसे में यदि रामसेतु तोड़ दिया जाए तो सुनामी की प्रलयकारी लहरों को भारत और श्रीलंका के तटीय समुद्री क्षेत्रों के बीच थामने वाला कोई नहीं होगा. सत्यम मूर्ति जी ने अपने एक पत्र में साफ-साफ़ कहा था- खतरा वास्तविक है परियोजना पुनर्निर्धारित करें.

एक बात और है जिसके कारण रामसेतु कि रक्षा जरूरी है, वह यह कि “हम किसी भी व्यापर अथवा बड़े से बड़े धन प्राप्ति के लिए अपनी इतिहासिक धरोहर को नष्ट नहीं कर सकते.” अगर करना है तो सरकार अन्य सभी इतिहासिक स्थलों (ताजमहल, लालकिला, आदि)को तुड़वा दे और साथ ही तुड़वा दे वो सभी संग्राहलय जहाँ-जहाँ एतिहासिक सामग्रियाँ रखीं हैं. जितनी भी धार्मिक पुस्तकें हों सब एक साथ जलवा दे, सारे मन्दिर-मस्जिद तोड़ दियें जाएँ, जब राम को काल्पनिक कह दिया गया तो फिर अयोध्या आदि का क्या महत्व है. फिर बड़े-बड़े पुरातत्व विभाग और इतिहासकारों की क्या जरूरत सब कुछ तोड़ कर पैसा इकठ्ठा कर ले सरकार. फिर तो भारत कि आर्थिक स्थिति सातवें आसमान पर होगी. अगर सरकार ये सब नहीं कर सकती तो फिर उसे रामसेतु तोड़ने का भी कोई अधिकार नहीं, किसी भी परिस्थिति में नहीं, किसी कीमत पर नहीं.

“अब जानिये कि मेरी दुविधा क्या है ? मेरी दुविधा ये है कि क्या मैं सही हूँ ?

कृपया आप सभी अपने-अपने विचारों से अवगत कराएँ, मैं सभी के विचारों का नम्र ह्रदय से स्वागत करता हूँ.”

जय श्री राम

धन्यवाद

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37 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
September 25, 2013

प्रिय आशीष जी, सादर! इस आलेख को मैं आज ही देख रहा हूँ! आपके और बहुत सारे विद्वानों की राय भी पढी. इसे बचाने के लिए कई बार आन्दोलन हुए हैं और अभी तक इसे नहीं तोडा जा सका है, यह खुशी की बात है! प्राचीन धरोहरों को बचाए रकहन हम सबकी जिम्मेदारी है हमारी सरकारों को भी ..इसके अलावा जो वैज्ञानिक तथ्य जो पेश किये गए हैं, वह भी इसे तोड़ने और अमेरिका को दान देने के लिए गलत कदम होगा! उपयोगी तथ्य प्रस्तुत करने के लिए आपका हार्दिक अभिनन्दन!

    ashishgonda के द्वारा
    October 3, 2013

    आदरणीय सादर अभिवादन. रामसेतु बहुत ही गंभीर मामला है उसके सम्बन्ध में कुछ जो जानकारियाँ मुझे थी वो मैंने यहाँ बांटने का प्रयास किया है कहाँ से मिली..? इसका उत्तर सदैव मैं यही देता हूँ कि कोई माँ के पेट से तो सीख कर आया नहीं है इसीलिए यही से मिली…इतनी गंभीरता से इस प्रकरण पर नज़र डालने के लिए आभार…

    ashishgonda के द्वारा
    October 24, 2013

    बहुत बहुत आभार आपको कई बार उत्तर देने की कोशिश की पर शायद किसी तकनीकि समस्या के कारण रह जाता …

aman kumar के द्वारा
October 17, 2012

राम सेतु को तोड़ने से हालाँकि आर्थिक रूप से भारत सरकार को बहुत फायदा होगा | क्योंकि इससे भारत और श्रीलंका के बीच की दूरी बहुत कम हो सकती है | लेकिन सभी फैसले एस आधार पर पर नहीं लिए जा सकते ! हमारे देश में हर उस निशान को मिटने की साजिश हो रही है |जो हमारा गोरब बन सकती है दुनिया में नाम कर सकती है | वो राम मंदिर हो या राम सेतु | दुनिया के सब देश अपने को प्राचीनतम बताने की होड़ में रहेते है और हम ? अपनी पहचान नस्त करना चाह रहे है |भारत की संस्कृति और सभ्यता को भी ध्यान में रखना होगा ! बहुत सटीक आलेख दिया है आपने !

    ashishgonda के द्वारा
    October 17, 2012

    आदरणीय! श्री अमन कुमार जी! समर्थन भरी प्रतिक्रिया के लिए आभार,,,, यद्यपि ये आलेख पुराना हो चूका है, तथापि आपने पढ़ने के लिए ध्यान दिया आपको धनयवाद. निवेदन है ऐसे ही अवलोकन करते रहिएगा, और मार्गदर्शन भी.

bharodiya के द्वारा
September 11, 2012

भाई आशीश नमस्कार तुमने सिर्फ धार्मिक एंगल से ये लेख लिखा । ईस का आर्थिक एंगल भूल गये । मैं लिखना चाहता था ईस विषय पर अब तुमने ही बात छेड दी है तो दुसरा भाग लिखो, अर्थिक एंगलवाला । केरला से ले कर उडिसा तक के समुद्र तट पर थोरियम नाम का पदार्थ मिलता है । जहांपर राम सेतु है वहां पर उस का खजाना है, राम सेतु के पत्थरों मे बडी मात्रा में थोरियम है । उस की किमत ४८ लाख करोड रुपिया आंकी गई है । दुनिया का सब से बडा जथ्था भारत में ही है । थोरियम युरेनियम की जगह ले सकता है । बिजली बनाने के लिए अणुशक्ति थोरियम से मिल सकती है । थोरियम का जथ्था अब अमरिका को चाहीए । हमारी मुर्ख सरकार ने वो जथ्था दे दिया है परमाणु संधी के बदले में । जाहिर में अमरिका हमे युरेनियम देगा और भारत उसे रुपया देगा । थोरियम का सौदा तो टेबल के निचे से हुआ है तो करुणानिधी और दूसरे भ्रष्ट नेताओं की कंपनिया राम सेतु तोडने के बहाने सारा मलबा अमरिका को भेज देगी जो ४८ लाख करोड का होगा । अमरिका चोरी का माल समज कर सस्ते में ही ले लेगा । मेरी बात पे मत जाना । थोरियम लिखकर, हिन्दी और अंग्रेजी में , गुगल कर लेना । बहुत सा रेफरंस मिल जायेगा । विडियो मिलेगा वो भी बराबर देख लेना ।

    ashishgonda के द्वारा
    September 11, 2012

    मित्र! आपने बहुत अच्छी बात बताई, मैंने थोरियम के विषय पर इतना ध्यान नहीं दिया उसके लिए धन्यवाद, जहाँ तक मेरा मानना है कि हिंदुओं की आस्था और संवैधानिक दृष्टि से भी रामसेतु तोडना गलत होगा. आपने satish3840 की प्रतिक्रिया तो पढ़ी होगी, उनके और आपके सहयोग से लेख पूरा हुआ. समय मिला तो जरूर लिखूंगा परन्तु वादा नहीं कर सकता.

chaatak के द्वारा
September 6, 2012

उत्तम, तथ्यपरक, विचारोत्तेजक! सनातन धर्म को आज ऐसे ही मुखर हिन्दुओं की आवश्यकता है जो तथ्यों को सामने रखें, उदारण सहित आइना दिखाएँ और अड़ जाएँ| वन्देमातरम घोष कर आगे बढ़ो, आशीर्वाद!

    ashishgonda के द्वारा
    September 6, 2012

    आदरणीय गुरूजी! प्रतिक्रिया और आशीष के लिए ह्रदय से आभार,,,,

dineshaastik के द्वारा
August 1, 2012

आशीष जी हिन्दु धर्म विरोधी पोस्ट पर सटीक प्रतिक्रिया देने के लिये हृदय से आभार…..

    ashishgonda के द्वारा
    August 3, 2012

    आदरणीय! सादर आपमें अपना कीमती वक्त दिया हार्दिक धन्यवाद.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 19, 2012

मैं रामसेतु से कोई भी छेड़छाड़ “नहीं किये जाने” का समर्थन करता हूँ ! सस्नेह.

    ashishgonda के द्वारा
    July 19, 2012

    आदरणीय! अनुकूलतम प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद. निवेदन है इसी तरह मार्गदर्शन करते रहिएगा.

Mohinder Kumar के द्वारा
July 18, 2012

आशीष जी, भावनायें और परिस्थियां दो अलग अलग वस्तु हैं.. रामसेतु से भारत के लोगों की भावनायें जुडी हैं इससे कोई इन्कार नहीं है. परन्तु मानवीय प्रगति के लिये कई बार कडे कदम लेने जरूरी होते हैं… जैसे डेम, सडक या कोई फ़ैक्टरी बनाते समय लोगों को विस्थापित करना. यहां तक सुनामी का सवाल है वह तो किसी और तरफ़ से भी आ सकती है. सभी आपदाओं से राम सेतु तो बचाने से रहा. आम आदमी के बजाये इस विषय पर एक्स्पर्ट ही सही निर्णय ले सकते हैं. यह सब में आपके लेख के संर्दभ में अपनी प्रतिक्रिया भर दे रहा हूं जो मेरी व्यक्तिगत राय है… मेरा मन्तव्य किसी के विचारों का विरोध करना नहीं है… लिखते रहिये और स्नेह बनाये रखिये.

    ashishgonda के द्वारा
    July 19, 2012

    आदरणीय सादर प्रणाम, सबसे पहले तो मैं आपको प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद कहता हूँ. ऐसा नहीं है कि मैं आपकी बातो से सहमत नहीं हूँ, या मैं एक्सपर्ट के निर्णय को गलत कहना चाहता हूँ. वरन कुछ वैज्ञानिको ने यह भी माना है कि जिसने भी सेतुसमुद्रम परियोजना बनायीं है उसने इस बारे में पूरी छान-बीन नहीं कि है. अगर किसी को यह लगता है कि मानवीय प्रगति के लिए कठोर कदम उठाया जाना आवश्यक है,तो सबसे पहले तो लखनऊ का अम्बेडकर पार्क तोडना चाहिए जहा केवल पैसो कि बर्बादी कि गयी है, उन हाथियों से क्या लाभ ले रही है सरकार? और पैसो के लिए हम अपनी इतिहासिक धरोहर खो दे यह भी तो अच्छा नहीं होगा. अगर आपको लगता है कि पैसा ज्यादा जरूरी है तो फिर सबसे पहले तो ताज महल तोडना चाहिए उसमें लगे संगमरमर तो काफी मंहगे बिकेंगे. प्राकृतिक आपदाओं का कही से भी आक्रमण हो सकता है, इसका मतलब ये तो नहीं कि जहाँ हमारी सुरक्षा का इंतजाम है उसे भी नष्ट कर दिया जाय, वैसा तो मृत्यु सबकी एक दिन होती ही है तो क्या कोई अपनी बीमारी का इलाज न कराये, मरते तो बड़े-बड़े नेता मंत्री भी हैं, तो फिर वे अपने अंगरक्षको पर पैसा क्यों लुटाते हैं, क्यों सरकार हमारे देश कि सीमाओं पर सैनिको को खड़ा करके पैसा खर्च कर रही है, उसी तरह यह भी एक हमारा सौभाग्य है कि बिना चाहे ही सुनामी के कहर से एक तरफ से कोई दिक्कत नहीं है हम उस दिक्कत को पैदा नहीं करना चाहेंगे. “इस मंच आने का सबका एक ही उद्देश्य है अपने विचारों से लोगो को अवगत करना, और दूसरों के विचारों को सुनना, वही मैं भी कर रहा हूँ, आप भी कर रहें हैं.” मैं ये जानता हूँ कि वाद-विवाद इस मंच कि मर्यादा के खिलाफ है, और आप भी हमसे जीवन के अनुभवों में बड़े हैं, फिर भी मैंने ये धृष्टता की है जिसके लिए मैं आपसे और इस मंच से क्षमा मांगता हूँ.

pritish1 के द्वारा
July 17, 2012

आशीष भाई मैंने कहानी की दो और भाग प्रकाशित कर दिए हैं ऐसी ये कैसी तमन्ना है……..2 ऐसी ये कैसी तमन्ना है……3 क्यूँ बनया हमने ऐसा समाज……..? इस ब्लॉग पर अवश्य अपनी प्रतिक्रिया दीजिये आपका मित्र प्रीतीश

    ashishgonda के द्वारा
    July 17, 2012

    मित्र! अवश्य ही समय मिलते मैं आपकी वो कहानी भी पढूंगा, मुझे अवगत कराने के लिए धन्यवाद.

pritish1 के द्वारा
July 17, 2012

मित्रवर, हमारी संस्कृति पर कितने ही आघात हो चुके हैं किन्तु क्या करैं हम गाँधी जी के बन्दर जो ठहरे बुरा मत देखो बुरा मत सुनो बुरा मत बोलो………..हमारी सरकार आजादी के समय से नपुंसक रही है…….हमारी अपनी संस्कृति को मार देना उन्होंने धर्म समझ लिया है………हमें कुछ करना होगा…….मैं गाँधी जी नहीं बनना चाहता……… प्रीतीश

    ashishgonda के द्वारा
    July 17, 2012

    आदरणीय प्रीतीश जी! बिलकुल सच कहा आपने, हम सब गाँधी जी के बन्दर हैं, किसी को एक बार सुधरने का मौका दिया जाता है तो सामने वाला हमारी मजबूरी को कमजोरी समझ लेता है किसी कीमत राम सेतु नहीं टूटने देंगे, जय श्री राम प्रतिक्रिया के लिए सधन्यवाद.

July 16, 2012

राम सेतु का खंडन अपनी संस्कृति पर आघात करना है ।

    ashishgonda के द्वारा
    July 17, 2012

    मान्यवर! सादर, अनुकूलतम प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद.

Chandan rai के द्वारा
July 16, 2012

मित्र , रामसेतु हमारे कथाकथित देविक या अदेविक की अतुल्य इंजीनियरिंग का अनमोल प्रमाण है , ऐसी अद्भुत अविश्वनीय कृति को नष्ट करना मुर्खता से भरा काम होगा ! हम व्यापार के और विकल्प तलाश सकते है पर दूसरा रामसेतु निर्माण असंभव है ! आप ने इस मुद्दे के द्वारा लोगो का जाग्रीकरण किया है अद्भुत लेखन !

    ashishgonda के द्वारा
    July 16, 2012

    मित्र चंदनजी! सादर, आपके प्रतिक्रिया में “रामसेतु हमारे कथाकथित देविक या अदेविक की अतुल्य इंजीनियरिंग का अनमोल प्रमाण है ” ये बात मुझे सबसे अच्छी लगी. आशा है ऐसे ही हौशला अफजाई करते रहेंगे. एक बार फिर प्रतिक्रिया के दिल से आभार…….

yogi sarswat के द्वारा
July 16, 2012

राम सेतु को तोड़ने से हालाँकि आर्थिक रूप से भारत सरकार को बहुत फायदा होगा क्योंकि इससे भारत और श्रीलंका के बीच की दूरी बहुत कम हो अज्येगी लेकिन सभी फैसले आरती पहलू पर नहीं लिए जा सकते ! भारत की संस्कृति और सभ्यता को भी ध्यान में रखना होगा ! बहुत सही आलेख दिया है आपने !

    ashishgonda के द्वारा
    July 16, 2012

    आदरणीय! सादर सर्वप्रथम आपको अनुकूलतम प्रतिक्रिया हेतु कोटि सधन्यवाद. यहाँ मैं एक बार फिर लिखना चाहूँगा, की इससे हमारे ऊपर प्राकृतिक आपदाओं का भी प्रकोप होगा, सुनामी से हमारी रक्षा कौन करेगा ? इस दृष्टि से भी रामसेतु खंडन एक अनुचित कार्य होगा.एक बार पुनः आभार,,,,

rajnithakur के द्वारा
July 15, 2012

आशीष जी, रामसेतु के बारे में अत्यंत तथ्यपरक आलेख प्रस्तुत करने के लिए बधाई..

    ashishgonda के द्वारा
    July 15, 2012

    प्रतिक्रिया और बधाई के कोटि सधन्यवाद.

satish3840 के द्वारा
July 15, 2012

आशीष जी आपने सही कहा हें ये धार्मिक ऐतिहशिक धरोहर के साथ देश में सुनामी के प्रकोप को भी कम करता हें / कहीं ये पढ़ा था की इसमें थोरियम भे हें जो परमाणु ऊर्जा के काम आता हें / अतः सरकार को जल्द बाजी में कोई फैसला नहीं करना चाहिए / सभी लाभ हानि पर विचार कर जन भावना का ध्यान भी रखना चाहिए

    ashishgonda के द्वारा
    July 15, 2012

    मान्यवर! सादर   आपने अपना कीमती वक्त मुझे दिया इसके लिए आभार…. निवेदन है ऐसे ही अपना आशीष प्रदान करते रहिएगा

jagojagobharat के द्वारा
July 15, 2012

राम शेतु हमारी आस्था का प्रतिक है और हम सनातन धर्मालंबियो के लिए पूजनीय और यही बात इस सरकार की आँखों की किरकिरी बनी हुई है की ऐन केन प्रकारेण हमारी आस्था पर चोट पहुचाई जाये और पोप को खुश किया जाये किन्तु ऐसा होने नहीं दिया जायेगा .आप की बातो से पूर्ण सहमत .बहुत सुन्दर आलेख ..इस मामले को ब्लॉग पर लाने के लिए हार्दिक धन्यवाद

    ashishgonda के द्वारा
    July 15, 2012

    मान्यवर! सबसे पहले मैं आपकी अनुकूलतम प्रतिक्रिया पर आभार व्यक्त करता हूँ. और आपसे कहना चाहूँगा की कृपया इसी सोंच को हमेशा जीवित रखियेगा और साथ ही मेरा मार्गदर्शन भी करते रहिएगा.

dineshaastik के द्वारा
July 15, 2012

आशीष जी, यदि सरकार ने रामसेतु तोड़ दिया तो यह साबित हो जायगा  कि हमारी सरकार असंवेदनशील है। यह भारतीय संस्कृति में विश्वास नहीं  रखती तथा विदेशी ताकते हमारी सरकार का संचालन कर रहीं हैं। सुनामी से जिसने रक्षा की उस कवच को नष्ट करना क्या सरकार की अज्ञानता का प्रतीक नहीं होगा???

    ashishgonda के द्वारा
    July 15, 2012

    आदरणीय! बिलकुल सही प्रश्न है आपका, इसी बात पर मैं भी प्रकाश डालने की कोशिश कर रहा हूँ. रामसेतु तोड़ना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं. अनुकूलतम प्रतिक्रिया के तहे दिल से शुक्रिया.अगर किसी देश और भारत में युद्ध छिड जाये तो शायद हमारे वीर जवान उन्हें पराजित कर दें, परन्तु यदि सेतु तोड़ दिया गया तो यही मानना पड़ेगा की भारत में बिना युद्ध कठपुतली सरकार चल रही है.

shashibhushan1959 के द्वारा
July 15, 2012

आदरणीय आशीष जी, सादर ! प्राचीनतम प्राकृतिक धरोहरों से, जिससे करोड़ों लोगों की आस्था भी जुडी हुई है, उससे छेड़छाड़ करना किसी भी हालत में उचित नहीं है ! “सेतुसमुद्रम” परियोजना संशोधित की जा सकती है, पर रामसेतु एक बार नष्ट हो जाने पर दुबारा नहीं बनवाया जा सकता ! मैं रामसेतु से कोई भी छेड़छाड़ “नहीं किये जाने” का समर्थन करता हूँ ! सादर !

    ashishgonda के द्वारा
    July 15, 2012

    परम आदरणीय! सादर प्रणाम. आपका सहयोग पाकर अत्यंत हर्ष हुआ, जो बात मैंने नहीं लिखी थी उसे आपने लिखकर मेरा लेख पूरा कर दिया. प्रतिक्रिया और सहयोग के लिए आभार……..आशा है ऐसे ही आशीष की बरसात होती रहेगी. जय श्री राम

nishamittal के द्वारा
July 15, 2012

आप सही हैं,आपके विचारों से सहमत हूँ आशीष.

    ashishgonda के द्वारा
    July 15, 2012

    प्रणाम माँ जी! आपकी अनुकूलतम प्रतिक्रिया पढकर मुझे कितनी खुशी हुयी ये नहीं बता सकता, निवेदन है ऐसे ही कृपा दृष्टि बनाये रखियेगा. प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार……


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